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    मधेपुरा:गर्भवती महिलाओं का पोषण महिला एवं गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए जरूरी


    गर्भवती महिलाओं का पोषण महिला एवं गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए जरूरी
    - उचित पोषण के अभाव में विकास प्रभावित होता है -गर्भस्थ शिशुओं के लिए भी आवश्यक है गर्भवती का पोषण
    मधेपुरा, 26 नवम्बर।
    गर्भवती महिलाओं का पोषण महिला एवं गर्भस्थ शिशु दोनों के विकास के लिए आवश्यक है। यदि गर्भवती महिला कुपोषण का शिकार रहती हैं तो उनके गर्भस्थ शिशु पर भी इसका असर पड़ सकता है।

    गर्भवती महिलाओं का पोषण-एक साथ दो जीवन पोषितः
    जिला पोषण समन्वयक, अंशु कुमारी ने कहा कि महिला के गर्भवती होने के बाद शरीर में कई प्रकार के परिवर्तन भी होते हैं। इन परिवर्तन के लिए आवश्यक पोषण उन्हें मिलना जरूरी है। उचित पोषण के अभाव में उनका विकास प्रभावित होता ही है। साथ में उनके गर्भस्थ शिशु के विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इनमें कई परिवर्तन उनके शरीर के पोषण पर निर्भर करता है। जैसे यदि वे आयरन से भरपूर पोषक तत्व ग्रहण नहीं करती हैं तो उनके शरीर में आयरन की कमी यानि एनीमिया से ग्रसित हो जाने की संभावना बढ़ जाती है। क्योंकि उनके गर्भस्थ शिशु के लिए आवश्यक है कि गर्भवती के शरीर में उपयुक्त मात्रा में हीमोग्लोबीन का स्तर बना रहे। ऐसे में उन्हें चाहिए कि हरी पत्तीदार सब्जियों जैसे- पालक, लाल व हरा साग, गाजर, चुकन्दर, अनार आदि खाद्य पदार्थों का सेवन करें ताकि उनके शरीर का हीमोग्लोबीन का स्तर बना रहे। जिससे उनका तो पोषण हो ही साथ में उनके गर्भस्थ शिशु का भी सर्वांगीण विकास हो सके। जहाँ तक गर्भस्थ शिशु के शारीरिक एवं मानसिक विकास का संबंध है इसके लिए भी गर्भकाल के दौरान गर्भवती को कैल्शियम एवं प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करना अनिवार्य है। गर्भवती को कैल्शियम की कमी न होने पाये इसके लिए उन्हें चाहिए कि दूध, पनीर, पॉल्ट्री उत्पाद, मांस, मछली आदि का सेवन करें। इससे उनके शरीर को मजबूती मिलती ही है, साथ में उनके गर्भस्थ शिशु के आधारभूत ढ़ांचे के विकास के लिए आवश्यक कैल्शियम भी उपलब्ध हो सकेगा और गर्भस्थ शिशु के सभीं अंगों का विकास समुचित ढ़ंग से हो पायेगा। एक स्वस्थ माँ ही स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती है। प्रोटीन जो कि गर्भस्थ शिशु के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है का भी गर्भवती महिलाओं को सेवन करना चाहिए। प्रोटीन की प्राप्ति के लिए उन्हें दाल, बीन्स, राजमा की फलियाँ आदि को अपने भोजन में उचित स्थान देना चाहिए।
    गर्भस्थ शिशुओं के लिए भी आवश्यक है गर्भवती का पोषण-
    गर्भकाल के दौरान माँ का पोषण ही गर्भस्थ शिशु के पोषण का एकमात्र जरिया रहता है। ऐसे में आवश्यक है कि गर्भवती का पोषण का ख्याल रखा जाय। गर्भवती के पोषित होने से गर्भस्थ शिशु भी पोषित जन्म लेंगे। उनमें जन्म काल से ही कई प्रकार की बीमारियाँ एवं शरीर के साथ-साथ मानसिक विकार नहीं होंगे।

    कोरोना काल में गर्भवती को रखना चाहिए अपना खास ख्याल-
    -अपने घर के वैसे व्यक्ति जो बाहर से जाते-आते रहते हैं उनसे दूरी बनाये रखें
    -साफ-सफाई का खास ख्याल रखें, अपने आस-पास गंदगी न होने दें
    -जांच आदि करवाते समय शारीरिक दूरी एवं मास्क का उपयोग निश्चित रूप से करें
    -घर में रहें या बाहर हाथों को बराबर विषाणुमुक्त करते रहें।

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