सुपौल/एक दूसरे के पूरक हैं पोषण एवं पोषण वाटिका - ETV BIHAR NEWS
  • Breaking News

    सुपौल/एक दूसरे के पूरक हैं पोषण एवं पोषण वाटिका


    एक दूसरे के पूरक हैं पोषण एवं पोषण वाटिका-

    23 अक्टूबर, सुपौल।
    सुपौल जिले में कुपोषण दूर करने में पोषण वाटिका अहम भूमिका निभा रही है। कुपोषण दूर करने के इस सस्ते और सुलभ तरीके में परिवार एवं समाज की अहम भूमिका रही है। कुपोषण दूर करने के लिए किये जा रहे प्रयासों ने लोगों को जगारूक किया है।

    क्यों होता है कुपोषण-
    जिला पोषण समन्वयक पिंकी कुमारी ने बताया कि कुपोषण की शुरुआत गभर्वती महिलाओं के गभर्धारण के समय से हो जाती है। धात्री महिलाओं को उचित पोषण नहीं मिलना इसके मुख्य कारणों में से एक है। इस दिशा में सरकार द्वारा चलाये जा रहे अभियान के तहत धात्री महिलाओं का गांवों से लेकर जिला स्तर तक कुपोषण के बचाने के उपाय सुनिश्चित किये जा रहे हैं। इन्हीं उपायों में से एक है पोषण वाटिका।

    क्या है पोषाण वाटिका-
    सरकार के स्तर किये जा रहे प्रयासों में से एक पोषण वाटिका एक ऐसी पहल है जिसके तहत घर के अगल-बगल के ऐसे जगह जहाँ पारिवारिक श्रम से परिवार के उपयोग में आने वाले मौसमी फल व सब्जियाँ उगायी जा सकें। जिससे कुपोषण कम होगा। पोषण वाटिका की सोच कुपोषण को मात देने की है। इसको लेकर आईसीडीएस द्वारा आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पोषण वाटिका के निर्माण करने के निर्देश दिए गए हैं। पोषण वाटिका का अर्थ है आस-पास के खाली स्थानों पर मौसमी फल व सब्जियाँ का उत्पादन करना। साथ ही समुदाय को इसके लिए भी प्रेरित करना है कि वह अपने घरों के आस-पास पोषण वाटिका का निर्माण करें। यह एक बेहतर पहल है। इससे समुदाय को घर पर ही हरी साग-सब्जियों के माध्यम से पोषण की आपूर्ति की समस्या का समाधान करने में आसानी होगी। यह केवल कुपोषण कम करने की दिशा में की गयी पहल तक सीमिति नहीं है, बल्कि इससे समुदाय में पोषक तत्वों की जरूरत पर भी एक सकारात्मक संदेश जाएगा।

    कुपोषण का सीधा संबंध आहार से है-
    नवजात शिशुओं के आरंभिक 1000 दिन यानि गर्भकाल से लेकर दो साल तक माता एवं शिशु का आहार एक ऐसा माध्यम है जिससे कुपोषण समूल नष्ट हो सकता है। जिसमें पोषण वाटिका की भूमिका अति महत्वपूर्ण है। जिले में मात्र पारिवारिक सहयोग से कुपोषण दूर करने का यह तरीक काफी सफल हो रहा है। लोगों को कुपोषण के प्रति जागरूकता बढ़ी है। जिसमें आंगनबाड़ी की एक मत्वपूर्ण भूमिका रही है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को कुपोषण के प्रति जागरूक कर रही हैं। उनके द्वारा ही जमीनी स्तर पर गभर्वती महिलाओं की पहली सूची संधारित की जाती है जो आगे बढ़कर प्रखण्ड एवं जिला स्तर पर संकलित की जाती है। साथ ही उन्हें कुपोषण को दूर करने की विभिन्न साधनों में एक पोषण वाटिका संबंधी जानकारियाँ भी दी जाती हैं। जिले के चयनित मॉडल आंगनबाड़ियों में पोषण की क्यारी का निमार्ण किया गया है। इस प्रकार पोषण वाटिका जिले में कुपोषण दूर करने में सहायक सिद्ध हो रहा है।

    पोषण वाटिकाओं में प्रयुक्त होते हैं जैविक खाद-
    कुपोषण को दूर करने के उद्देश्य से बनायी जा रही पोषण वाटिकाओं में जैविक खाद यथा- गोबर, वर्मी कम्पोष्ट, ग्रामीणों द्वारा पाले जा रहे पशुओं के मूत्र आदि से निर्मित अति सूक्ष्म जैविक उत्पादों का प्रयोग किया जा रहा है, जिसके उपयोग से पोषण वाटिका की लागत कम से कम और ज्यादा पोषक मौसमी फल-सब्जियों का उत्पादन हो रहा है।

    शून्य से दो वर्ष के बच्चों के पोषण में न करें कोई कोताही-
    इस विषय पर जोर देते हुए जिला पोषण समन्यक ने बताया कि नवजात शिशुओं को उनकी माता से मिलने वाला पहला गाढ़ा दूध उनके लिए अतिआवश्यक है। यह उनके रोग प्रतिरोधक क्षमतों के विकास में काफी सहायक होता है। साथ ही दूध पिला रही माताओं का समुचित पोषण करते रहने से शिशुओं को मिलने वाला दूध भी पोषक तत्वों से भरपुर रहता है।

    कोरोना काल में इन उचित व्यवहारों का करें पालन
    - एल्कोहल आधारित सैनिटाइजर का प्रयोग करें।
    - सार्वजनिक जगहों पर हमेशा फेस कवर या मास्क पहनें।
    - अपने हाथ को साबुन व पानी से लगातार धोएं।
    - आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें।
    - छींकते या खांसते वक्त मुंह को रूमाल से ढकें।

    No comments

    Total Pageviews

    Followers