सुपौल:शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए किशोरावस्था में सही पोषण जरूरी - ETV BIHAR NEWS
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    सुपौल:शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए किशोरावस्था में सही पोषण जरूरी


    शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए किशोरावस्था में सही पोषण जरूरी

    पोषक तत्व शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है
    किशोरावस्था में आयरन व विटामिन बहुत लाभदायक

    सुपौल, 22 अक्टूबर। शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए किशोरावस्था एक महत्वपूर्ण समय है। कोविड -19 के समय में बढ़ते बच्चों की शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए । इस दौरान संपूर्ण विकास के लिए सही पोषक तत्वों की अहम भूमिका होती है। पोषक तत्व शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं। शरीर के सभी अंगों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। खासकर, किशोरावस्था में इस पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। दरअसल किशोरावस्था में शरीर में तेजी से बदलाव होते हैं। इस दौरान अच्छा पोषण स्वस्थ्य मातृत्व को सुनिश्चित करने के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता विकास में भी सहयोगी होता है।

    किशोरावस्था मे पोषक तत्वों की सबसे अधिक जरुरत:
    सिविल सर्जन डाक्टर कृष्ण मोहन प्रसाद ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की मानें तो लगभग 80 प्रतिशत शारीरिक विकास किशोरवस्था में हो जाता है। कुल वजन का लगभग 65 प्रतिशत वजन एवं कुल ऊँचाई का 15 से 20 प्रतिशत किशोरावस्था में ही प्राप्त हो जाता है। इसके अलावा 45 प्रतिशत अस्थितंत्र का विकास भी इस दौरान ही होता है। इसलिए किशोरावस्था में शेष सभी आयु वर्ग की तुलना में पोषक तत्वों की जरूरत सबसे अधिक होती है। इस दौरान विटामिन ए, विटामिन बी-12, फोलिक एसिड, विटामिन बी-3, विटामिन सी एवं आयोडीन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की अधिक जरूरत होती है। इस दौरान ही पोषक आहार सेवन करने की आदत का विकास होता है जो युवावस्था से लेकर आगे की जिन्दगी पर भी प्रभाव डालता है।

    उम्र के अनुसार पोषक तत्वों की जरूरत:
     सिविल सर्जन डाक्टर कृष्ण मोहन प्रसाद ने बताया कि किशोर एवं किशोरियों में उम्र के हिसाब से पोषक तत्वों की जरूरत होती है। 11 से 14 वर्ष तक आयु-वर्ग की किशोरियों में 2200 किलो-कैलोरी एवं इसी आयु-वर्ग के किशोरों में 2500 किलो-कैलोरी ऊर्जा की जरूरत  होती है। जबकि 15 से 18 वर्ष तक आयु-वर्ग तक की किशोरियों के लिए 2200 किलो-कैलोरी ऊर्जा एवं इसी आयु-वर्ग के किशोरों के लिए 3000 किलो-कैलोरी ऊर्जा की जरूरत  होती है। इसी प्रकार आयरन, कैल्शियम, जिंक, विटामिन सी एवं फोलिक एसिड की मात्रा भी किशोर एवं किशोरियों के उम्र पर निर्भर करती है।
    सुरक्षित मातृत्व के लिए किशोरी का पोषण है महत्वपूर्ण:

    सिविल सर्जन डाक्टर कृष्ण मोहन प्रसाद ने बताया कि किशोरी पोषण स्वस्थ मातृत्व की कुंजी होती है। किशोरावस्था में बेहतर पोषण से किशोरी में खून की कमी नहीं होती है। जिससे भविष्य में माँ बनने के बाद प्रसव के दौरान संभावित जटिलताओं में काफ़ी कमी आ जाती है। किशोरी को साप्ताहिक आयरन फ़ोलिक एसिड अनुपूरण कार्यक्रम के तहत दी जाने वाली आयरन फोलिक एसिड की गोली का सेवन करना चाहिए। साथ ही रोज के आहार में आसानी से उपलब्ध पोषक तत्वों को शामिल करने से भी स्वस्थ रहा जा सकता है। इसमें हरी साग-सब्जी, मौसमी फ़ल, गुड एवं भूना चना, दूध के साथ अंडे एवं मीट को शामिल करना चाहिए। इससे किशोरियों को आहार के जरिये संतुलित पोषण प्राप्त हो सकता है।

    कोरोना काल में  इन उचित व्यवहारों का करें पालन 
    - एल्कोहल आधारित सैनिटाइजर का प्रयोग करें।
    - सार्वजनिक जगहों पर हमेशा फेस कवर या मास्क पहनें।
    - अपने हाथ को साबुन व पानी से लगातार धोएं।
    - आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें।
    - छींकते या खांसते वक्त मुंह को रूमाल से ढकें।

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