सुपौल/सेवा भाव को जब बनाया कोरोना के खिलाफ़ हथियार, मुहिम हुयी और असरदार - ETV BIHAR NEWS
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    सुपौल/सेवा भाव को जब बनाया कोरोना के खिलाफ़ हथियार, मुहिम हुयी और असरदार

    सेवा भाव को जब बनाया कोरोना के खिलाफ़ हथियार, मुहिम हुयी और असरदार 

    • कोरोना योद्धा के रूप मे डीपीएम दे रहें महत्वपूर्ण योगदान 
    • कोरोना के साथ अन्य स्वास्थ्य सेवाओं का भी रखते हैं ध्यान

    सुपौल, 12 अक्टूबर: कोरोना चाहे कितनी भी चुनौतियाँ पेश करे, उन्हें मात देने के लिए कोरोना योद्धा एक दीवार की तरह खड़े हो रहे हैं. कोरोना को मात देने के लिए कई स्तर पर लोगों की भूमिका भी समय के साथ उभर कर सामने आने लगी है. इसी मुहिम की कड़ी में जिले के डीपीएम बाल कृष्ण चौधरी भी बखूबी योगदान दे रहे हैं. कोरोना संक्रमण की शुरुआत से ही बाल कृष्ण चौधरी ने काफ़ी सक्रियता से कार्य को अंजाम देना शुरू किया था, जो अभी भी उसी रफ़्तार से जारी है. उनके कुशल नेतृत्त्व का ही असर है कि जिले में कोरोना की दस्तक भी अन्य जरुरी स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावित नहीं कर सका. 

    जरुरी स्वास्थ्य सेवाएं को नहीं होने दिया बाधित

    बाल कृष्ण चौधरी गत 3 वर्षों से जिले के डीपीएम हैं. उनके डीपीएम बनने के बाद से जिले की स्वास्थ्य सेवाओं में भी गति आई है। वह अपने काम पर न केवल ध्यान देते हैं बल्कि अपने सहयोगियों की छोटी-मोटी समस्याओं को अपनी सूझबूझ से हल भी कर देते हैं। डीपीएम बाल कृष्णा चौधरी ने बताया मौजूदा समय में कोरोना से जुडी हरेक सेवाओं को जिले में सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया, जो अभी भी जारी है. जिले भर में ज्यादा से ज्यादा कोरोना की जांच हो, इस पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने बताया स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए जा रहे सभी कार्यक्रमों को कोरोना काल में सुचारू रूप से जारी रखना एक बढ़ी चुनौती थी. लेकिन सभी स्वास्थ्य कर्मियों के सहयोग से अन्य जरूरी सेवाओं को जिले में सुचारू रखा गया है जिसे एक उपलब्धि की तरह देखा जा सकता है.  

    नियमित रूप से अधिकारियों के साथ करते हैं बैठक 

    डीपीएम बाल कृष्ण चौधरी लॉकडाउन के दौरान जिले का दौरा कर अधिकारियों के साथ फीडबैक शेयर करने के साथ समय-समय पर आइसोलेशन वार्ड, जिला अस्पताल एवं  प्रखंड अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों का हौसला भी बढाते रहे हैं। क्षेत्र भ्रमण के दौरान लोगों को संदेश भी देते रहते हैं कि कोरोना से बचाव का एकमात्र उपाय मास्क व सोशल डिस्टैंसिंग ही है। सभी लोग अपने घरों में रहें. जब तक कोई विशेष परिस्थिति उत्पन्न न हो, घर से बाहर न निकलें एवं अन्य लोगों को भी घरों में रहने को प्रेरित करें। ऐसे संदेशों को समुदाय तक पहुँचाने पर उन्होंने विशेष ध्यान दिया है.  बाल कृष्णा चौधरी कहते हैं, विश्व स्तर पर कोरोना एक महामारी के रूप में लगातार फ़ैल रही है. ऐसे समय घरों में रहना ही एकमात्र बचाव है। अपने एवं अपने परिवार की सुरक्षा के लिए जिले के सभी लोग अपने घरों में रहें. इसके अलावा जब बाहर निकले तो मास्क का नियमित उपयोग व हाथों की नियमित रूप से धुलाई करें। 

    भेदभाव एवं भ्रांतियों से बचने का भी संदेश देते रहते हैं :

    बालकृष्ण चौधरी ने लोगों को भेदभाव एवं भ्रांतियों से बचने का भी संदेश देते रहते हैं। वह बताते हैं, कोरोना संक्रमण काल में कोई भी संक्रमित हो सकता है. संक्रमित लोगों के प्रति अपनी सोच में बदलाव लाएं. कोरोना से लड़ रहे व्यक्ति, स्वास्थ्यकर्मी या पुलिस किसी से भी मानसिक दूरी नहीं बनायें. उनके प्रति नकारत्मक सोच नहीं रखें. कोरोना को हराकर जंग जीतने वाले लोगों से किसी भी तरह से घबराने की कोई जरूरत नहीं है. संक्रमण ठीक होने के बाद उनके संपर्क में आने पर कोई संक्रमित नहीं होता है. कोरोना योद्धाओं का सम्मान करें, जो ऐसी विषय परिस्थितियों में लोगों की सेवा करने में दिन-रात जुटे हैं.

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