सहरसा:कोविड -19 के नियमों को ध्यान में रख सभी आँगनवाड़ी केन्द्रों पर मना अन्नप्राशन दिवस - ETV BIHAR NEWS
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    सहरसा:कोविड -19 के नियमों को ध्यान में रख सभी आँगनवाड़ी केन्द्रों पर मना अन्नप्राशन दिवस


    कोविड -19 के नियमों को ध्यान में रख सभी आँगनवाड़ी केन्द्रों पर मना अन्नप्राशन दिवस

    6 माह के बच्चों को दिया गया पोषाहार
    पूरक पोषाहार पर दी गयी जानकारी
    धात्री माताओं को शिशु कुपोषण तथा मतदान पर किया गया जागरूक

    सहरसा, 19 अक्टूबर। शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए आईसीडीएस विभाग द्वारा बेहतर प्रयास किया जा रहा है। कोरोना संक्रमण के इस दौर में भी आंगनवाड़ी सेविकाएँ अपनी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तत्पर हैं । हर महीने की तरह इस माह भी सेविकाओं द्वारा अपने पोषक क्षेत्र में घर-घर जाकर 6 माह से ऊपर के बच्चों का अन्नप्राशन करवाया गया। इस दौरान घर पर बच्चों का कैसे ख्याल रखें, जिससे वह संक्रमण के साथ-साथ अन्य बीमारियों से भी बचा रह सके, इन सबकी भी जानकारी दी गई। साथ ही लोगों को मतदान के लिए भी जागरूक कर रही हैं।
    सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर अन्नप्राशन दिवस का आयोजन 
    डीपीओ रीता सिन्हा ने बताया कि जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर अन्नप्राशन दिवस का आयोजन किया गया। सभी सेविकाओं ने अपने - अपने पोषक क्षेत्रों मेँ 6 माह के शिशुओं को खीर खिलाकर इसकी शुरुआत की है। इस दौरान अन्य धात्री माताओं को भी पूरक पोषाहार एवं साफ़- सफाई के विषय में जानकारियाँ दी गयीं। साथ ही धात्री माताओं को उबली हुई सब्जी, दलिया एवं अन्य पूरक आहार भी दिया गया।  
    डीपीओ रीता सिन्हा ने बताया कि बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए 6 माह तक सिर्फ स्तनपान एवं इसके बाद स्तन पान के साथ पूरक पोषाहार बहुत जरूरी होता है। 6 माह से 23 माह तक के बच्चों के लिए यह अति आवश्यक है। 6 से 8 माह के बच्चों को दिन भर में 2 से 3 बार एवं 9 से 11 माह के बच्चों को 3 से 4 बार पूरक आहार के साथ 12 माह से 2 साल तक के बच्चों को घर में पकने वाला भोजन भी देना चाहिए। इस दौरान शरीर एवं दिमाग का विकास तेजी से होना शुरू होता है। जिसके लिए स्तनपान के साथ ऊपरी आहार की भी जरूरत होती है। उन्होंने बताया कि इसके लिए नियमित रूप से धात्री माताओं को इस विषय में जानकारी दी जाती है एवं पूरक पोषाहार भी वितरित किया जाता है।

    ऐसे दें बच्चों को पूरक आहार:
      जिला पोषण समन्वयक रौनक प्रताप सिंह ने बताया कि 6 माह से 8 माह के बच्चों के लिए नरम दाल, दलिया, दाल-चावल, दाल में रोटी मसलकर अर्ध ठोस (चम्मच से गिराने पर सरके, बहे नही) , खूब मसले साग एवं फल प्रतिदिन दो बार 2 से 3 भरे हुए चम्मच से देना चाहिए। ऐसे ही 9 माह से 11 माह तक के बच्चों को प्रतिदिन 3 से 4 बार एवं 12 माह से 2 वर्ष की अवधि में घर पर पका पूरा खाना एवं  धुले एवं कटे फल को प्रतिदिन भोजन एवं नास्ते में देना चाहिए।   
    पूरक पोषाहार है जरूरी : समेकित बाल विकास योजना के अंतर्गत 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों के बेहतर पोषण के लिए पोषाहार वितरित किया जाता है। पूरक पोषाहार के विषय में सामुदायिक जागरूकता के अभाव में बच्चे कुपोषण का शिकार होते हैं। इससे बच्चे की शारीरिक विकास के साथ मानसिक विकास भी अवरुद्ध होता है एवं अति कुपोषित होने से शिशु मृत्यु दर में भी बढ़ोतरी होती है।

    कोविड-19 से बचाव के लिए भी किया गया जागरूक :

    *मास्क का प्रयोग अवश्य करें
    * सफाई के लिए अपने हाथों को लगातार धोते रहें हाथ गंदे नहीं होने पर भी उसे साबुन से धोएं और फिर सैनिटाइज करें
    * एक - दूसरे से परस्पर दो गज की दूरी बनाकर रखें
    * किसी से बाचतीत के दौरान भी मास्क का प्रयोग जरूर करें  
    *सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ वाली जगह से बचे

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